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सरोकार  | 12.03.2010

हमें आपसी लड़ाई का अखाड़ा न बनाएं: करज़ई

 

अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने भारत और पाकिस्तान से साफ़ साफ़ कहा है कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद अफ़ग़ानिस्तान को परोक्ष लड़ाई का मैदान न बनाएं. अमेरिका और ईरान से भी कहा कि हमारी धरती पर तुम्हारी लड़ाई नहीं चाहिए.

 

दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार इस्लामाबाद गए करज़ई ने गुरुवार को कहा कि उनके देश को अमन की ज़रूरत है न कि लड़ाई का अखाड़ा बने रहने की. अमेरिका और ईरान को भी संदेश देते हुए करज़ई ने परोक्ष युद्ध बंद करने की बात दोहराई. अफ़ग़ान राष्ट्रपति ने कहा, ''हम नहीं चाहते कि भारत और पाकिस्तान अफ़गा़निस्तान में परोक्ष युद्ध करें. हम नहीं चाहते कि अफ़ग़ानिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच भी प्रॉक्सी वार हो.'' Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift:  

हालांकि इस दौरान करज़ई ने भारत और पाकिस्तान की तारीफ़ की और ऐतिहासिक रिश्तों का हवाला भी दिया. उन्होंने कहा कि भारत और अफ़ग़ानिस्तान गहरे दोस्त हैं और पाकिस्तान जुड़वा भाई की तरह है. उन्होंने कहा, ''भारत अफ़ग़ानिस्तान का क़रीबी दोस्त है लेकिन पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान का भाई है. पाकिस्तान जुड़वा भाई है, हम साथ जुड़े हुए हैं, हम में से कोई भी अलग नहीं है.''

गुरुवार को करज़ई ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी से मुलाकात भी की. दोनों के बीच पाकिस्तान में हाल ही ग़िरफ़्तार किए गए तालिबान के टॉप सैन्य कमांडर अब्दुल गनी बरादर भी चर्चा हुई. करज़ई ने पाकिस्तान से बरादर के प्रत्यपर्ण की मांग की. इसके जवाब में गिलानी ने कहा, ''हमारी अपनी न्याय व्यवस्था है. हम कानूनी विशेषज्ञों से बातचीत कर रहे हैं. जो कुछ भी होगा हम राष्ट्रपति को बताएंगे.''

पाकिस्तान की एक अदालत ने हाल ही में तालिबान के एक नेता को दूसरे देश के हवाले किए जाने से इनकार किया था. भारत और अफ़ग़ानिस्तान आरोप लगाते हैं कि पाकिस्तान तालिबान की मदद कर रहा है. विश्लेषक भी इस बात से सहमत है कि पाकिस्तान तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान में भारत के बढ़ते प्रभाव के ख़िलाफ़ एक औज़ार की तरह इस्तेमाल कर रहा है.

लेकिन बीते कुछ महीनों में तस्वीर बदलती दिख रही है. हाल के दिनों में पाकिस्तान में कई तालिबान नेताओं की ग़िरफ़्तारी हुई है, अमेरिका के दबाव में हो रही इन कार्रवाइयों से पाक-अफ़ग़ान रिश्तों में शहद घुल रहा है. पश्चिमी देशों के विश्लेषक कहते हैं कि इस नए गणित से भारत असहज महसूस कर रहा है. भारत सरकार इसी हफ़्ते कह चुकी है कि वह अफ़ग़ानिस्तान में अपने कई कार्यक्रम समेटने जा रही है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/ओ सिंह

संपादन: एस गौड़

 
 

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